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ओड़िया भाषा-साहित्य के विकास से ही ओडिशा बनेगा विकसित राज्य: वक्ताअंतरराष्ट्रीय ओड़िया स्वाभिमान प्रतिष्ठान का 15वां राज्य सम्मेलन संपन्न

भुवनेश्वर, 3 दिसंबर।
कला-संस्कृति, लोकनृत्य, खनिज संपदा, पर्यटन स्थल, कृषि, वन, लंबा समुद्री तट और समृद्ध मानव संसाधन ओडिशा को प्रकृति एवं श्री जगन्नाथ प्रभु की अमूल्य देन हैं। इन संसाधनों के बावजूद राज्य का अपेक्षित विकास अब तक विभिन्न कारणों से संभव नहीं हो पाया है। वक्ताओं ने कहा कि हमारी पहली पहचान हमारी मातृभाषा है और ओड़िया भाषा-साहित्य के सर्वांगीण विकास से ही ओडिशा को एक विकसित राज्य के रूप में स्थापित किया जा सकता है।
यह विचार अंतरराष्ट्रीय ओड़िया स्वाभिमान प्रतिष्ठान की ओर से आयोजित 15वें राज्य सम्मेलन में व्यक्त किए गए। सम्मेलन में जाजपुर के सांसद रवी नारायण बेहरा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता एवं पूर्व मंत्री प्रशांत नंद, ज़ेवियर ग्रुप ऑफ स्कूल्स के अध्यक्ष डॉ. बद्रीनाथ पटनायक तथा मुंबई ओड़िया महासंघ के अध्यक्ष डॉ. बिपिन मिश्रा शामिल थे।
प्रतिष्ठान के अध्यक्ष सुसांत कुमार सावंत ने सम्मेलन की अध्यक्षता की, जबकि कार्यक्रम का संयोजन शांतनु कुमार राणा ने किया। इस अवसर पर सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया।
सम्मेलन में राज्य के विभिन्न हिस्सों से 400 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आयोजन की सफलता में संयुक्ता पांडा, मानस दास, श्रीकांत सावंत, सूर्य नारायण पात्र, आद्यश्री सावंत, तपन पांडा, देवेंद्र चौधुरी, हिरण्य पाट्र, रवि शंकर, नीलमाधव त्रिपाठी, मनोरंजन पाणिग्राही, जयश्री सावंत और मनोरंजन पाढ़ी सहित अनेक लोगों का उल्लेखनीय सहयोग रहा।